हनुमान की इस चालाकी के कारण माँ चंडी हुई रावण से क्रोधित तथा जो बना रावण के मृत्यु का कारण !

Story Of Maa Chandi And Ravan:

(Story Of Maa Chandi And Ravan) क्या आप को पता है की रावण के मृत्यु का एक कारण माँ चंडी का रावण से रुष्ट होना भी था जो हनुमान जी की चतुरता के कारण सम्भव हो पाया था. बहुत कम लोग इस कथा को जानते है. यह एक ऐसी कथा है जो सीधे नवरात्री और दशहरा को एक दूसरे से जोड़ती है.

पौराणिक कथा  के अनुसार, राम जी ने एक दिन ब्रह्मा जी का आह्वान किया. जब वे श्री राम के समक्ष प्रकट हुए तो राम ने अपने दोनों हाथ जोड़ विन्रम भाव में उनसे पूछा हे, प्रभु मुझे बलशाली लंकेश्पति रावण  को युद्ध में पराजित करने का कोई उपाय सुझाय .ब्रह्मा जी श्री राम से बोले की आप को जगत जननी माँ चंडी को प्रसन्न करना होगा. उनके आशीर्वाद के प्रभाव से आप रावण को पराजित कर सकते है. राम जी ने माँ चंडी के पूजा के लिए दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था करी तथा पूरी भक्ति से उनकी आराधना में लग गए.

उधर रावण ने भी माँ चंडी  (Story Of Maa Chandi And Ravan) की पूजा पुरे विधि-विधान के साथ शुरू कर दी. दूर दूर से उच्च कोटि के ब्राह्मण माँ चंडी के लिए किये जा रहे यज्ञ में बुलाये गए. जब यह बात इंद्र देव  को ज्ञात हुई तो उन्होंने यह सुचना पवन देव के माध्यम से राम तक पहुचाई. इस तरह हनुमान  को भी यह पता चला की रावण माँ चंडी को प्रस्सन करने के लिए एक बड़े यज्ञ का आयोजन करवा रहा है. हनुमान जी अनेक सिद्धियों और शक्तियों के स्वामी थे. उन्होंने अपने शक्तियों के प्रभाव से एक छोटे बालक का रूप धरा तथा लंका जा पहुंचे. उन के बालक रूप के कारण लंका में उन्हें कोई पहचान नही पाया. बालक रूपी हनुमान जी यज्ञ में हुए सम्मलित ब्राह्मणो की खूब सेवा-सत्कार करने लगे. उनकी सेवा देख सभी ब्राह्मण बहुत प्रसन्न हुए तथा उस बालक को पास बुला कोई भी एक वरदान मागने को कहा. हनुमान जी इसी मोके के इंतजार में थे वे तुरंत बोले हे ब्राह्मणो अगर आप के द्वारा माँ चंडी के यज्ञ में पढ़े जा रहे मंत्रो में एक शब्द बदल दे तो यही मेरे लिए वरदान होगा. ब्राह्मण बालक रूपी हनुमान की इस बात को समझ न सके तथा एक बालक की इच्छा समझ उस वरदान के लिए सहमत हो गए.

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”भर्तिहरणी” यानि मनुष्यो की रक्षा करने वाली होता है इसी में “ह” की जगह “क” लगाने से भर्तीकरणी हुआ, जिसका अर्थ होता प्राणियों का नाश करने वाली. रावण की इस यज्ञ में माँ चंडी का घोर अपमान हुआ. रावण द्वारा किया गया सारा यज्ञ व्यर्थ गया. माँ चंडी रावण के प्रांगण में हुए अपने अपमान से क्रोधित हो गई तथा उसी दिन से रावण के सर्वनाश के लिए प्रतिबद्ध हुई. उसी दिन रावण का सर्वनाश होना निश्चित हुआ.

इधर राम द्वारा की गयी आराधना से माँ चंडी ने प्रसन्न होकर उन्हें विजयी होने का अाशीर्वाद दिया. इस तरह हनुमान के चतुराई से यज्ञ में बदले गए मंत्रो के द्वारा रावण को युद्ध में पराजय मिली और राम की विजय हुई.

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