साईं बाबा से जुडी एक अनोखी कहानी !

story of shirdi sai baba

story of shirdi sai baba :

एक बार शिर्डी में साईं बाबा का भक्त अनंतराव पाटणकर साईं के दर्शन की अभिलाषा से वहा पहुंचा. उन्होंने सारे वेद और उपनिषेद पढ़ रखे थे तथा उन्हें तत्व ज्ञान भी भली-भाती पता था. इसके बावजूद उनका मन अशांत था. वे साईं बाबा  के समीप गए. साईं बाबा उनको देख मुस्कराने लगे और प्रसन्नता से उनके गले मिले. अंनतराव पाटणकर ने साईं बाबा की पहले चरणवंदना करी तथा इसके बाद उनका आशीर्वाद ग्रहण कर उनसे पूछा बाबा, मेने संसार के समस्त पुराणो और ग्रंथो का का अध्यन किया है, यहाँ तक की मुझे सम्पूर्ण उपनिषदों का भी ज्ञान है. परन्तु मेरे लिए ये सब व्यर्थ प्रतीत हो रहा है क्योकि मुझे इन सब ज्ञान के बावजूद मन की शांति प्राप्त नही हो रही है .इसलिए बाबा में आपकी शरण में अाया हु कृपया मेंरा मार्गदर्शन करिये.

बाबा ने मुस्कराते हुए अनंतराव पाटणकर की ओर देखा और एक कथा सुनाने लगे – एक बार एक सौदागर यहाँ शिर्डी में अपनी एक घोड़ी के साथ आया. जब वह उस घोड़ी से उतरा तो उसने देखा की उसकी घोड़ी ने उसके सामने ही लीद के नो गोले डाल दिए. सौदागर बहुत ही जिज्ञासु प्रवर्ति का था अतः उसने तुरंत अपनी धोती का एक छोर फाड़ा और उसमे उन लीद के नो गोलों को रख लिया. इस से उस सौदागर के मन को शन्ति की प्राप्ति हुई. इतना कहकर साईं बाबा चुप हो गए. पाटणकर को इस कथा के पीछे का रहस्य समझ में नही आया. उन्होंने इस कथा के बारे में काफी सोचा, परन्तु वे इस कथा रहस्य को जानने में असफल रहे.