जानिए कैसे शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर !

shani dev dev raj indra

shani dev dev raj indra
shani dev dev raj indra:
के राजा होने के कारण देवराज इंद्र को अपने आप पर बहुत घमंड आ चूका था तथा अन्य देवताओ को वे अपने समक्ष तुच्छ समझते थे. अपनी राजगद्दी को भी लेकर वे इतने आशंकित रहते थे की यदि कोई ऋषि मुनि तपश्या में बैठे तो वे आतंकित हो जाते थे, कहि वो वरदान में त्रिदेवो से इन्द्रलोक का सिहासन ना मांग ले. ऐसे ही एक दिन अभिमान में चूर इंद्र देवता स्वर्गलोक में ही कहि भ्रमण कर रहे थे की तभी उन्हें नारद जी उनकी ओर आते दिखाई दिए. नारद जी उनके समीप आते ही उनसे अन्य देवताओ के बारे में चर्चा करने लगे तथा उनकी महत्ता बताने लगे. इंद्र देवता को नारद मुनि की बात बिलकुल भी पसंद नही आये और कहने लगे की आप मेरे सामने अन्य देवताओ की विशेषता बतलाकर मेरा अपमान करना चाहते है, आप से मेरी ख्याति सहन नही हुई जाती.
इस पर नारद मुनि देवराज इंद्र से बोले की देवराज आप मेरी बातो को अपना अपमान न समझे, यह आप की भूल है और वैसे भी प्रशंसा उसकी की जाती है जो खुद पे घमंड छोड़ कोई प्रशंसनीय कार्य करे. इसे सुन इंद्र नारद मुनि से चिढ गए तथा बोले में समस्त देवो का राजा हु जिस कारण अन्य देवो को मेरे सामने झुकना ही पड़ेगा. मेरे कारण सृष्टि चलती है क्योकि मेरे आदेश पर ही अन्य देवता कार्य करते है अगर में वरुण देव को धरती पर वर्षा न करने को कहु तो पुरे धरती पर अकाल पड जायेगा और देवता भी इसके प्रभाव से अछूते नही रहेंगे. इंन्द्र ने नारद मुनि का अपमान करते हुए कहा की आप जैसा इधर उधर भटकने और मजीरा बजाने वाला व्यक्ति देवराज जैसे महत्वपूर्ण उपाधि के महत्व और दायित्व को क्या जाने.

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