जानिए क्यों की जाती है शालिग्राम शीला की पूजा और इसे किसका अवतार माना जाता है !

shaligram shila worship

shaligram shila worship

shaligram shila worship:

प्राचीन काल से भारत भूमि हमेशा से ऋषि मुनियो की भूमि रही है, हिन्दू धर्म की संस्कृति  बहुत ही दुर्लभ है इसलिए बहुत ही दुर्लभ और अद्भुत वस्तुए हमे देवी-देवताओ के अवतारों के रूप में मिली है. देवी-देवताओ के अवतार के रूप में इन दुर्लभ वस्तुओ में एक वस्तु शालिग्राम भी सम्मलित है इस शालिग्राम शीला को भगवान विष्णु का ही एक अवतार माना जाता है तथा इसमें भगवान विष्णु के दसो अवतार समाहित है. पुराणो के अनुसार जिस घर में शालिग्राम शीला स्थापित हो वह घर समस्त तीर्थो  से भी श्रेष्ठ माना जाता है. अनेको पूजाओं में शालिग्राम शीला को भी सम्लित किया जाता है. खासतौर से सत्यनारायण की कथा में भगवान विष्णु के समीप शालिग्राम शीला रखी देखी जा सकती है यह आमतौर पर काला और लाल रंग का होता है जो गंडक नदी के किनारे ही पाया जाता है. भगवान विष्णु के शालिग्राम में परिवर्तित होने की दो कथाये है.

पहली कथा के अनुसार एक बार माँ लक्ष्मी और सरस्वती के बीच लड़ाई हो गयी और गुस्से में माता सरस्वती ने लक्ष्मी को श्राप दिया की तुम धरती का एक पौधा बन जाओ. माँ लक्ष्मी स्वर्ग से पृथ्वी पर तुलशी के पोधे के रूप में विराजमान हो गई. माँ लक्ष्मी को स्वर्ग में ले जाने के लिए भगवान विष्णु गंडक नदी में उनका इंतजार कर रहे थे, उस नदी के कुछ शिलावो पर भगवान विष्णु की दशावतारों के छाप पड गए और वे पत्थर शालिग्राम शीला के नाम से प्रसिद्ध हुए.