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अाइये एक नज़र डालते है अग्नि पुराण पर – जो है पुराणो में सबसे लघु आकार का पुराण !

agni puran

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Agni Puran

(agni puran) पुराण का शब्दिक अर्थ होता है पुराना या प्राचीन जो ”पूरा एवं अण” शब्द से मिलकर बना है. पूरा शब्द का अर्थ होता है अनागत एवं अतीत तथा अण शब्द का अर्थ होता है कहना और बतलाना अर्थात जो अतीत के तथ्यों, सिधान्तो, शिक्षा, नीतियों और घटनाओ का विवरण प्रस्तुत करे.

माना जाता है की सृष्टि के रचनकर्ता ब्रह्माजी ने जिस प्राचीनतम धर्मग्रन्थ की रचना की थी उसे पुराण के नाम से जाना जाता है. शस्त्रों के अनुसार कुल 18 विख्यात पुराण बताये गए है जो मह्रिषी वेदव्याश द्वारा रचित है. इन पुराणो में अग्नि द्वारा सुनाई गई पुराण का नाम है अग्नि पुराण. इस पुराण का नाम अग्नि देव के नाम पर ही रखा गया है. इस पुराण को अग्नि देव ने मह्रिषी विशिष्ठ को सुनाई थी.

पुराणमय वर्णन के अनुसार अग्नि पुराण को भगवान विष्णु का बाया चरण कहा गया है .अत्यंत लघु आकर होने के कारण भी इसमें समस्त विद्याओ का समावेश किया गया है. अग्नि पुराण में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा सूर्य के पूजा उपासना का वर्णन है. अग्नि पुराण में 383 अध्याय तथा 15000 श्र्लोक हैं.

Agni Puran

 

इस पुराण को भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोष कह सकते है. इस ग्रंथ में मत्स्यावतार, रामायण तथा महाभारत की संक्षिप्त कथायें भी संकलित हैं. इसके आलावा यह पुराण दो भागो में है पहले भाग में पूर्ण ब्रह्म विद्या का सार है तथा अंतिम भाग में धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद जिनको उप-वेद भी कहा जाता है.

अग्नि पुराण में अग्नि देव ने ईशान कल्प का वर्णन मह्रिषी विशिष्ठ से किया है. इस पुराण में सर्वप्रथम पुराण से संबंधित प्रश्न पूछे गए है. फिर अवतारों की कथा कही गई है . फिर सृष्टि के निर्माण के बारे में बताया गया है तथा फिर विष्णु भगवान के पूजा का वर्णन किया है. इसके बाद अनेक मन्त्र व ज्योतिशास्त्रो तथा नाना प्रकार की दीक्षाओं का वर्णन है.

भगवान् अग्निदेव ने देवालय निर्माण के फल के विषय में आख्यान दिए हैं और चौसठ योगनियों का सविस्तार वर्णन भी है. शिव पूजा का विधान भी बताया गया है. इसमें काल गणना के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला गया है. साथ ही इसमें गणित के महत्त्व के साथ विशिष्ट राहू का वर्णन भी है. प्रतिपदा व्रत, शिखिव्रत आदि व्रतों के महत्त्व को भी दर्शाया गया है. साथ ही धीर नामक ब्राह्मण की एक कथा भी है. दशमी व्रत, एकादशी व्रत आदि के महत्त्व को भी बताया गया है. अनेक विद्वानो ने अग्नि पुराण को भारतीय संस्कृति का विश्वकोश कहा है !

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