आखिर कैसे बने पाण्डु पुत्र भीम इतने शक्तिशाली !

पाण्डु के पांच पुत्रो में से दूसरे पुत्र थे भीम. माना जाता है की कुंती पुत्र भीम के पास हज़ारो हाथियों का बल था. एक बार उन्होेने अपनी भुजाओ से नर्मदा नदी के पर्वाहो को रोक दिया. भीम को हनुमान का पुत्र भी कहा जाता है. पवन पुत्र इसलिए क्योकि पाण्डु पुत्र नही कर सकते थे तो कुंती ने पवन देव का आह्वान किया. उनके आशीर्वाद के फलस्वरूप ही माता कुंती को पुत्र के रूप में भीम प्राप्त हुए. अगर बल को देखा जाये तो युद्ध में सबसे ज्यादा शक्तिशाली भीम के पुत्र घटोत्कच  के बाद भीम थे .

पर आखिर भीम को यह शक्ति प्राप्त हुई कहा से इस के पीछे एक रोचक कथा है .. यह सभी जानते हैं कि गांधारी  का बड़ा पु‍त्र दुर्योधन और गांधारी का भाई शकुनि, कुंती के पुत्रों को मारने के लिए नई-नई योजनाएं बनाते थे. कहते हैं कि इसी योजना के तहत एक बार दुष्ट दुर्योधन ने धोखे से भीम को विष पिलाकर उसे गंगा नदी में फेंक दिया. मूर्छित अवस्था में भीम बहते हुए नागों के लोक पहुंच गए. वहां विषैले नागों ने उन्हें खूब डंसा जिससे भीम के शरीर का जहर कम होने लगा यानी जहर से जहर की काट होने लगी.

जब भीम की मूर्छा टूटी, तब उन्होंने नागों को मारना शुरू कर दिया. यह खबर नागराज वासुकि के पास पहुंची, तब वे स्वयं भीम के पास आए. वासुकि के साथी आर्यक नाग ने भीम को पहचान लिया.आर्यक नाग भीम के नाना के नाना थे. भीम ने उन्हें अपने गंगा में धोखे से बहा देने का किस्सा सुनाया. यह सुनकर आर्यक नाग ने भीम को हजारों हाथियों का बल प्रदान करने वाले कुंडों का रस पिलाया जिससे भीम और भी शक्तिशाली हो गए !

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