कैसे उत्तपन्न हुई माँ काली और क्यों बने शिव बालक रूपी !

maa kali and shiva:

एक बार दारुक नाम के असुर ने ब्रह्मा को प्रसन्न किया. उनके द्वारा दिए गए वरदान से वह देवो और ब्राह्मणो को प्रलय की अग्नि के समान दुःख देने लगा. उसने सभी धर्मिक अनुष्ठान बंद करा दिए तथा स्वर्गलोक में अपना राज्य स्थापित कर लिया. सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु  के धाम पहुंचे. ब्रह्मा जी ने बताया की यह दुष्ट केवल स्त्री दवारा मारा जायेगा. तब ब्रह्मा , विष्णु सहित सभी देव स्त्री रूप धर दुष्ट दारुक से लड़ने गए. परतु वह दैत्य अत्यंत बलशाली था, उसने उन सभी को परास्त कर भगा दिया.

ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देव भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंचे तथा उन्हें दैत्य दारुक के विषय में बताया. भगवान शिव ने उनकी बात सुन माँ पर्वती की ओर देखा और कहा हे कल्याणी जगत के हित के लिए व दुष्ट दारुक के वध के लिए में तुमसे प्राथना करता हु. यह सुन माँ पर्वती मुस्कराई और अपने एक अंश को भगवान शिव में प्रेवश कराया. जिसे माँ भगवती के माया से इन्द्र आदि देवता और ब्रह्मा नही देख पाये उन्होंने देवी को शिव के पास पूर्ववत बैठे देखा.

माँ भगवती  का वह अंश भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर उनके कंठ में स्थित विष से अपना आकार धारण करने लगा. विष के प्रभाव से वह काले वर्ण में परिवर्तित हुआ. भगवान शिव ने उस अंश को अपने भीतर महसूस कर अपना तीसरा नेत्र खोला. उनके नेत्र द्वारा भयंकर-विकराल रूपी व काली वर्ण वाली माँ काली उत्तपन हुई. माँ काली के लालट में तीसरा नेत्र तथा चन्द्र रेखा थी. कंठ में कराल विष का चिन्ह था और हाथ में त्रिशूल व नाना प्रकार के आभूषण व वस्त्रो से वह सुशोभित थी. माँ काली के भयंकर व विशाल रूप को देख देवता व सिद्ध लोग भागने लगे.

माँ काली के केवल हुंकार मात्र से दारुक समेत, सभी असुर सेना जल कर भस्म हो गयी. माँ के क्रोध की ज्वाला से सम्पूर्ण लोक जलने लगा. उनके क्रोध से संसार को जलते देख भगवान शिव ने एक बालक का रूप धारण किया. शिव श्मशान में पहुंचे और वहाँ लेट कर रोने लगे. जब माँ काली ने शिवरूपी उस बालक को देखा तो वह उनके उस रूप से मोहित हो गयी. वातसल्य भाव से उन्होंने शिव को अपने हृदय से लगा लिया तथा अपने स्तनों से उन्हें दूध पिलाने लगी. भगवान शिव  ने दूध के साथ ही उनके क्रोध का भी पान कर लिया.उसके उस क्रोध से आठ मूर्ति हुई जो क्षेत्रपाल कहलाई.

शिवजी  द्वारा माँ काली का क्रोध पी जाने के कारण वह मूर्छित हो गई. देवी को होश में लाने के लिए शिवजी ने शिव तांडव किया. होश में आने पर माँ काली ने जब शिव को नृत्य करते देखा तो वे भी नाचने लगी जिस कारण उन्हें योगिनी कहा गया !

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