महाभारत ग्रन्थ के ”मौसल पर्व” के अनुसार पांडव वंशज की इस गलती से हुआ था कलयुग का आरम्भ !

How kalyug started:

How kalyug started क्या आपने कभी सोचा है की आखिर कलयुग का आगमन इस धरती में कैसे और क्यों हुआ है? कलयुग के प्रभाव के कारण ही धरती में मानव ही मानव से लड़ रहा है तथा हर जगह बुराई व्याप्त है. आज हर कोई अपने हित को ध्यान में रखकर मानवता को शर्मशार कर रहा है.

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महाभारत ग्रन्थ के ”मौसल पर्व” के अनुसार जब महाभारत के युद्ध में कौरवो के हार के बाद पांडवो ने हस्तिनापुर का राज्य संभाला. लेकिन महाभारत युद्ध के बाद अनेक अप्रिय घटना घटने लगी तथा महाभारत युद्ध के बाद कृष्ण द्वारिका चले गए. यादव राजकुमार धर्म का मार्ग छोड़ अधर्म के मार्ग में चल दिए तथा मास-मदिरा का सेवन करने लगे. परिणाम यह हुआ की सभी यादव आपस में ही लड़ कर मर गए जिनमे कृष्ण पुत्र साम्ब भी थे.

बलराम ने एक नदी के तट में जाकर ध्यान मुद्रा में लीन होकर अपने प्राण त्यागे तथा एक शिकारी ने भगवान श्री कृष्ण के पैर के तलवे में हिरण के भर्म में तीर मार दिया जिस कारण भगवान श्री कृष्ण  ने भी पृथ्वी छोड़ वैकुण्ठ धाम को प्रस्थान किया. हस्तिनापुर से अर्जुन ने आकर उनका श्राद किया व उनकी पत्निया रुक्मणीहेमवती आदि भगवान कृष्ण के साथ ही सती हो गई.
वही पांडव  भी स्वर्ग सिधार गए तथा सम्पूर्ण राज्य पांडवो के बाद उनके वंशज राजा परीक्षित के हाथ में आ गया. वे स्वभाव में बहुत ही सीधे व दयालु थे तथा धर्म का अनुसरण करते हुए राज्य चला रहे थे.

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How kalyug started एक दिन कलयुग  उनके पास आया तथा उनके विन्रम भाव का फायदा उठाते हुए उनसे अपने रहने के लिए स्थान माँगा. राजा परीक्षित कलयुग से मनुष्य पर पड़ने वाले प्रभाव से परिचित थे अतः उन्होंने कलयुग को इंकार कर दिया. परन्तु कलयुग रोने बिलखने लगा तथा उनकी दान वीरता की गाथा गाने लगा. उसने बड़ी चलाकी से राजा परीक्षित से स्थान देने के लिए हामी भरवा दी.

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तब राजा परिक्षिप्त ने कहा की तुम सिर्फ उन लोगो के मन में निवास कर सकते हो जो लोभ, क्रोध और काम वासना के अधीन हो. कलियुग ने तुरंत हा कर दी परन्तु राजा प्रक्षिप्त उसके चालाकी नही ताड पाये. फिर तो कलयुग ने बहला-फुसलाकर सबके मन में राज कर लिया. कालसर्प दोष होने के कारण राजा परीक्षित की मृत्यु हो गई जिस के बाद कलयुग को कोई नही रोक पाया और बिना किसी तय सीमा के कलयुग युगो युगो से यही निवास करने लगा

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