क्या कहता है भागवत पुराण कल्कि अवतार के बारे में !

Bhagwan vishnu kalki avtar : 

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‘‘ यदा यदा हिधर्मस्य ग्लार्निभवति भारतः
अभ्युत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम,
परित्राणय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्म
संस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे।’’

(Bhagwan vishnu kalki avtar) श्रीमद भागवत कथा में कहा गया है की जब जब धर्म की हानि होती हे और अधर्म का पलड़ा भारी होने लगता है तब भगवान स्वयं धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते है और दुस्टो का संहार करते है. पौराणिक कथाओ के अनुसार जब धरती पर पाप की सीमा बढ़ जाएगी तब दुष्टो के विनाश के लिए भगवान कल्कि का अवतार होगा जो विष्णु जी के अवतारों में से एक है. जब लोग धर्म का अनुसरण करना छोड़ देंगे तब ये अवतार होगा.

Bhagwan vishnu kalki avtar :

(Bhagwan vishnu kalki avtar) भागवत पुराण में (स्कंध 12, अध्याय 2) कल्कि अवतार की कथा विस्तार से है. कथा के अनुसार सम्भल ग्राम में कल्कि का जन्म होगा. अपने माता पिता की पांचवीं संतान कल्कि यथासमय देवदत्त नाम के घोड़े पर आरूढ़ होकर तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे और तब सतयुग का प्रारंभ होगा. बुद्ध से पहले कृष्ण को सोलह कलावो का अवतार माना जाता है. सभी अवतारों ने अपनी तरह से दुष्टो का दलन किया है. अब जिस अवतार का इंतजार किया जा रहा है वह निष्कलंक होगा और कला, कांति एवं देवी गुणों में उत्कृट होगा.

ऋषियों ने इस अवतार के स्वरूप की विवेचना में कहा है की कल्कि सफेद रंग के घोड़े पर सवार होकर अतितयो का वध करेंगे. इसका मतलब उनके आक्रमण में शांति (श्वेत रंग ) ,शक्ति (अश्व ) तथा परिष्कार (युद्ध) लगा हुआ है. धनुष और तलवार को हथियार के रूप में प्रयोग करने का मतलब है आसपास और दूरगामी दोनों तरहो की दुस्ट प्रवर्तियो को दूर करना !

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