क्यों है हमारे हिन्दू धर्म में गो माता का विशेष महत्व ?

importance of gomata

importance of gomata

importance of gomata :

गाय को हिन्दू धर्म शास्त्रो में माँ के रूप में पूजा जाता है. पूजनीय गो माता का स्थान समस्त देवी-देवताओ एवं तीर्थो में सर्वोपरि माना जाता है. गो माता के दर्शन मात्र से ही बड़े-बड़े यज्ञो, दानो और अन्य शुभ कार्यो का फल मिलता है. गोमाता को ग्राश खिलाने से वह सभी देवी देवताओ तक पहुंच जाता है.

धर्म ग्रंथो के अनुसार यदि समस्त देवी दवताओं और पितरो को प्रसन्न करना हो तो, गो सेवा से बढ़कर कोई अनुष्ठान नही है. गो माता को स्वयं भगवान कृष्ण नंगे पाव जंगल – जंगल चराते फिरते थे तथा उन्होंने अपना नाम भी गोपाल रख लिया था. गो माता की रक्षा के लिए उन्होंने गोकुल में जन्म लिया था. शास्त्रो में सब योनियों में मनुष्य योनियों को श्रेष्ठ माना गया है वह इसलिए क्योकि गोमाता की निर्मल छाया में हम अपने जीवन को धन्य कर सकते है. गाय का सादापन, सरलता, आत्मीयता उसके स्वभाव से देखने को मिलती है. यदि मनुष्य के शिशु को किसी कारण माँ का दूध प्राप्त न हो तो गो माता के दूध द्वार भी उसका पालन किया जा सकता है. गाय को किसी भी रूप में सताना घोर पाप माना जाता है. गाय की हत्या करने वाले के लिए सीधे नरक का द्वार खुलता है, उसे कई जन्मो तक दुःख भोगने पड़ते है.

पुराणो के अनुसार 84 हजार योनियों के बाद आत्मा को अंतिम योनि गाय के रूप में मिलती है. गाय लाखो योनियों का वह पड़ाव है जिसके बाद आत्मा विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू करती है. गो माता एक ऐसा दिव्य स्थान, दिव्य मंदिर, दिव्य तीर्थ स्थल है जिसमे हजारो देवी देवताओ के दर्शन एक साथ होते है. भविष्य पुराण के अनुसार गो माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवता निवाशश करते है इसलिए गोसेवा करने से सभी 33 करोड़ देवी देवता प्रसन्न होते है.

गो माता के अंग जिन पर मुख्य रूप से निम्न देवी देवता निवाश करते है ;–
भगवान ब्रह्मा और विष्णु गोमाता के दो सींगो पर
सभी पवित्र स्रोत और ऋषि वेदव्याश सींगो के छोरो पर
भगवान शंकर मध्य मस्तक पर और माँ पर्वती मस्तक के किनारे पर
भगवान कार्तिकेय नाक पर अश्विनी कुमार दव्य कानो पर
आँखों में भगवान सूर्य और चन्द्रमा
पूछो पर सोम ,केशो पर सूर्य किरणे ,मूत्र में गंगा माता ,लक्ष्मी-यमुना गोबर में
दांतो और जिह्वा में पवन देव और वरुण देव
गाय माता के कंठ में सरस्वती माता
जांघो में भगवान धर्म देव
पीठ पर 11 रूद्र और यम ,पेट के क्षेत्र पर 12 आदित्य
मुख पर वेदो के 6 भाग, चरणो में चार वेद
तथा 33 करोड़ देव केशो में !

अब आप बिना Internet अपने फ़ोन पर पंचांग, राशिफल, आरती, चालीसा, व्रत कथा, वेद और पुराणो की कथाएं, हिन्दू धर्म की रीति-रिवाज और प्रमुख एवं अजीबो गरीब मंदिरो की जानकारी प्राप्त कर सकते है ! Click here to download

Related Post