बसंत पंचमी का महत्व !

importance of basant panchami

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importance of basant panchami :

बसंत पंचमी के आगमन पर सम्पूर्ण वातावरण शुद्ध और शुभ हो जाता है. पेड़-पोधो में नई कलियाँ फूटने लगती है, चारो और हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है. किसानो के खेतो में सरसों के पीले फूल की चमक चादर के समान बिछी होती है. हर तरफ रंग बिरंगी तितलिया मड़राने लगती है. इस मनोहर वातावरण को देख बच्चो से लेकर बड़े -बूढ़े तक में एक नई शक्ति का संचार होता है.

बसंत पंचमी  का यह पावन पर्व माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है. इसे माता सरस्वती के जनमोत्स्व के रूप में मनाया जाता है. माँ सरस्वती को विद्या और संगीत की देवी माना गया है. अतः इस दिन विद्यालयों के विद्यार्धियो द्वारा माँ सरस्वती की पूजा करी जाती है तथा उनसे ज्ञान का आशीर्वाद लिया जाता है. इन्हे समृद्धि और वैभव का स्वरूप कहा गया है. देवी सरस्वती हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, विशेषकर मनुष्य की तो उन्हें लगा की पृथ्वी में कुछ कमी रह गई है तथा हर तरफ एक उदासी सी छाई है. ब्रह्मा ने अपने दिव्य शक्तियों के प्रभाव से एक चतुर्भुजी स्त्री का निर्माण किया. जिसके एक हाथ में वीणा थी तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा.तथा अन्य दो हाथो में पुस्तके व मालाये थी. ब्रह्मा जी ने उनसे वीणा बजाने का निवेदन किया. जैसे ही उस स्त्री ने वीणा बजाई. धरती के समस्त प्राणियों और जीवो में वीणा के मधुर सुर से वाणी प्राप्त हो गई. वायु सरसराहट की आवाज करने लगी तथा नदियों में जैसे चेतना सी आ गई. तब ब्रह्मा ने उस देवी का नाम सरस्वती रखते हुए कहा की तुम विद्या और वाणी की देवी कहलाओगी. भगवान विष्णु ने देवी सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया की वसंत पंचमी  पर तुम्हारी आराधना की जाएगी.

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वसंत पंचमी के दिन माँ सास्वती की पूजा से, मनुष्य की वाणी मधुर होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है, विद्या में कुशलता प्राप्त होती है, सौभग्य बढ़ता है,तथा दीर्घायु मिलती है.
इस दिन माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण द्वारा स्वश्ति वाचन कराना चाहिए, इसके बाद माँ सरस्वती के पूजन में अक्षत, धुप, श्वेत पुष्प आदि अर्पित करने के साथ निम्न मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए.

“यथा वु देवि भगवान ब्रह्मा लोकपितामहः.
त्वां परित्यज्य नो तिष्ठंन, तथा भव वरप्रदा.
वेद शास्त्राणि सर्वाणि नृत्य गीतादिकं चरेत्.
वादितं यत् त्वया देवि तथा मे सन्तुसिद्धयः..
लक्ष्मीर्वेदवरा रिष्टिर्गौरी तुष्टिः प्रभामतिः.
एताभिः परिहत्तनुरिष्टाभिर्मा सरस्वति..

बसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चो को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है.यह पर्व हिन्दू धर्म में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है. जगह-जगह पर पतंगबाजी के उतस्वों का आयोजन किया जाता है. बच्चे-बड़े इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है. आसमान रंग-बिरंगे पतंगो के कारण और सुन्दर दिखने लगता है. इस दिन पितृ तर्पण किया जाता है. बसंत पंचमी के अवसर पर घरो में पुरषो द्वार कुर्ता-पजामा और स्त्रियों द्वारा पीले वस्त्र धारण करने की परम्परा है.

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