आखिर क्यों मानी जाती है माँ गंगा श्राद्ध के लिए पवित्र !

ganga perform pitru paksha shradh

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एक बार नारद मुनि ने ऋषि सनकजी से पूछा, आप शास्त्रो के पारदर्शी विद्वान है, मुझे बताये क्षेत्रो में उत्तम क्षेत्र और तीर्थो में उत्तम तीर्थ कौन सा है? तब ऋषि सनकजी नारद को बताते है, गंगा और यमुना का जो संगम है उसी को मह्रिषी लोग शास्त्रो में उत्तम क्षेत्र तथा तीर्थो में उत्तम तीर्थ कहते है. गंगा परम पवित्र नदी है यह भगवान विष्णु के चरणो से प्रकट हुई है. नदियों में श्रेष्ठ गंगा के स्मरण मात्र से ही समस्त क्लेश दूर होते है तथा सम्पूर्ण पापो का नाश होता है. गंगा के जलविन्दु का सेवन मात्र से ही राजा सगर की संतति परम पद को प्राप्त हुई.

तब नारद मुनि, ऋषि से राजा सगर के बारे में बताने का आग्रह करते है. ऋषि सनकजी नारद मुनि से कहते है बहुत वर्षो पूर्व सूर्यवंश में बाहु नामक राजा थे जो बहुत बड़े धर्मपरायण थे वह सारी पृथ्वी का धर्मपूर्वक पालन करते थे. एक बार बाहु के गुणों में दोष द्रिष्टी उत्पन्न हुई जिससे उनके मन में अहंकार उत्पन हो गया. वे अपने आपको समस्तलोको का पालन करने वाला बलवान राजा समझने लगे . उनके इस दोष के कारण हैहय और तालजध कुल के राजा उनके शत्रु बन गए तथा उन्हें युद्ध में परास्त किया.