अंकोरवाट मंदिर – जानिए पुरे विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर जो है एक राष्ट्र का राष्ट्रिय प्रतीक !

Angkor Wat :

Angkor wat विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक अंकोरवाट  मंदिर (Angkor wat temple) है जो कम्बोडिया के अंकोर में है. इसका पुराना नाम यशोधपुर था व इसका निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के शासन काल में हुआ था . यह मीकांग नदी के किनारे सिमरिप शहर में बना हुआ है व पुरे संसार का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर कहलाता है तथा इसका फैलाव सेकड़ो वर्ग मील में है. यह मंदिर विष्णु भगवान  को समर्पित है जबकि इसके पूर्ववर्ती शासको ने यहाँ बड़े-बड़े शिव के मंदिरो का निर्माण करवाया था. अंगोरवाट का यह हिन्दू मंदिर कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है जिसे इसके राष्ट्रिय ध्वज पर अंकित किया गया है.

यह मंदिर (Angkor wat) मेरु पर्वत का प्रतीक कहलाता है तथा इस मंदिर (Angkor wat) के दीवार पर भारतीय धर्मिक ग्रंथो के प्रसंगो का शिल्पकलाकारो ने बहुत ही सुन्दर रूप से चित्रण किया है. इन प्रसंगो में जगह-जगह पर अप्सराओ का चित्रण है व असुर और देवताओ के बीच हुए समुद्र मंथन का वर्णन भी दिखाया गया है. विश्व का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ ही यह मंदिर यूनेस्को के विश्व धरोवर स्थलों में से एक है. इस मंदिर (Angkor wat) का सूर्योदय व सूर्यास्त बहुत मनोरम होता है, जिसे करोड़ो पर्यटक देखने देश-विदेश के कोने-कोने से यहा पहुँचते है. उसी के साथ पर्यटकों को मंदिर का वास्तुशास्त्र भी बहुत लुभाता है. हिन्दू का यह एक पवित्र तीर्थ स्थल है.

अंग्कोरथोम और अंग्कोरवात में हमारे प्राचीन भारतीय संस्कृति के अवशेष देखे जा सकते है. यह मंदिर (Angkor wat) इस बात को सिद्ध करता है की पूर्व में भारतीयों ने सुवर्ण द्वीप, वन द्वीप व माल्या में अनेक राज्यों की स्थापना करी थी. वर्तमान कम्बोडिया के उत्तरी भाग में स्थित कम्बोज राज्य के बारे में बताते है की इस राज्य का शासक कौडिन्य ब्राह्मण था जिसका नाम वहा के एक संस्कृत अभिलेख से मिला है.

अंगोरवात मंदिर(Angkor wat) की एक प्रितिकृति भारत में भी बनने जा रही है जिसे अमेरिका के प्रसिद्ध पत्रिका टाइम ने विश्व की पांच सबसे आश्चर्यजनक प्रितिकृतियो में अव्वल माना है. पत्रिका के अनुसार विश्व धरोहर की ये प्रतिकृति बिहार के गंगा नदी  के किनारे बनाई जा रही है. इस मंदिर के निर्माण में ४० एकड़ की भूमि व सौ करोड़ की लागत का व्यय भारतीय मंदिर ट्रस्ट द्वारा वहन किया जायेगा. पत्रिका के अनुसार इस मंदिर का नाम अंकोरवाट राम मंदिर(Angkor wat) होगा तथा इसे भगवान विष्णु को न समर्पित कर भगवान राम को समर्पित किया जायेगा. जिस जगह इस बनाया जा रहा है, मान्यता है की श्री राम वनवास के दौरान वहा आकर ठहरे थे !

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