जानिए महाशम्भु भगवान शिव के समस्त 19 अवतारों के बारे में !

19 avatars of lord shiva:

जैसे भगवान विष्णु समय-समय पर अपने भक्तो के लिए धरती पर अनेको अवतार के रूप में अवतरित हुए  उसी तरह भगवान शिव ने भी अनेक अवतार लिए जिनमे कुछ अवतारों में उन्होंने अपने भक्तो को महत्वपूर्ण शिक्षा दी तो कुछ अवतार उन्होंने दुष्टो के नाश  के लिए लिया  भगवान शिव का हर अवतार उनके भक्तो के कल्याण के लिए था . शिवमहापुराण  के अनुसार भगवान शिव के अब तक 19 अवतार हुए है. आइये जानते है इन भगवान शिव के इन सभी अवतारों के बारे में ;

1.. यतिनाथ अवतार;- भगवान शिव ने यतिनाथ अवतार अथिति के महत्वता को अपने भक्तो के समक्ष रखने के लिए लिया था. पौराणिक कथा के अनुसार अर्बुदाचल पर्वत के निकट आहुक व आहुका भील दम्पति रहते थे. एक दिन भगवान शिव यतिनाथ के भेष में उनके कुटिया में आये तथा उनसे रहने के लिए स्थान माँगा. अपने घर में आये अतिथि  को देख दोनों दम्पति उनके अतिथि सत्कार में जुट गए तथा उनकी सेवा में कोई कमी ना आने दी. रात्रि के समय दोनों दम्पति ने यतिनाथ को कुटिया के अंदर विश्राम करने के लिए कहा तथा स्वयं दोनो कुटिया के बहार पहरा देंने लगे. मध्य रात्रि के समय उनके कुटिया के बहार एक जंगली जानवर आ गया अतिथि की रक्षा के लिए आहुक उस जानवर का वध करने गया तथा उस जानवर को मार दिया परन्तु इस युद्ध  में वह खुद भी मारा गया. अपने पती को मृत देख आहुका शोक से अपने पती के शरीर के पास बैठ गई. सुबह जब यति कुटिया से बाहर आये तो वे आहुक को मृत देख दुखी हुए. उन्हें दुखी देख आहुका बोली की आप क्यों दुखी होते है, अतिथि धर्म के लिए प्राण न्योछावर करना हम दोनो के लिए ही सौभग्य की बात है ऐसा कर मेरे पती धन्य हो गए है. अपने पती के चिता में सती होने से पूर्व आहुका को यतिनाथ ने भगवान शिव के रूप में प्रकट होकर दर्शन दिया तथा उसे उसके अगले जन्म में पुनः उसके पती से मिलने का वरदान दिया.

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2. कृष्णदर्शन अवतार:- इक्ष्वाकुवंशीय श्राद नवमी को राजा नभग का जन्म हुआ था. उन्हें विद्या के अध्ययन के लिए जब गुरुकुल भेजा गया तो वे काफी वर्षो तक वापस न लोटे. इसी बीच उनके भाइयो ने समस्त राज्य का बटवारा आपस में कर लिया. उनके वापस लौटने पर उनके पिता ने उन्हें यज्ञ परायण ब्राह्मणो के मोह को दूर कर उनके यज्ञ को सम्पन्न करते हुए उनसे धन प्राप्त करने को कहा. यज्ञ सम्पन्न होने के बाद अंगारिक ब्राह्मण ने अवशिष्ट धन नभग को देकर स्वर्ग में चले गए. उसी समय भगवान शिव कृष्णदर्शन रूप में प्रकट होकर नभग के अवशिष्ट धन को मागने लगे. उन दोनों के विवाद के बीच ही नभग के पिता वहा आ गए तथा उन्हें नभग ने अवशिष्ट धन का वास्तिवक अधिकारी बताने को कहा. तब उनके पिता ने शिव को पहचान नभग से कहा इस असली धन के अधिकारी तुम नही ये ब्राह्मण रूपी शिव है क्योकि यज्ञ में अवशिष्ट वस्तु उन्ही की होती है. तब नभग ने वह धन भगवान शिव को दे दिया. इस तरह इस अवतार में भगवान शिव ने धार्मिक कार्य के महत्व की बातो को बताया है.

3. अवधूत अवतार;- यह अवतार भगवान शिव ने इंद्र देव के घमंड को तोड़ ने के लिए लिया था. पौराणिक कथाओ के अनुसार एक बार इंद्र देव अन्य देवो के साथ भगवान शिव से भेट करने कैलाश पर्वत गए.  उसी समय उनके मार्ग में भगवान शिव अवधूत का अवतार लेकर आये  तथा इंद्र के लिए रुकावट बने. इंद्र ने अवधूत को उनके मार्ग से हटने के लिए कहा परन्तु अवधूत मार्ग से नही हटे इस पर इंद्र को क्रोध आ गया और उसने भगवान शिव रूपी अवधूत पर व्रज से प्रहार के लिए जैसे ही आगे बढ़ा वैसे ही उनका हाथ स्तम्भित हो गया. भगवान शिव को पहचान इंद्र उनसे क्षमा मागने लगा व भगवान शिव ने उसे अपने वास्तविक रूप में दर्शन देकर  उन्हें क्षमा कर दिया.

4. भिक्षुवर्य अवतार:- यह अवतार भगवान शिव ने अपने भक्त की रक्षा के लिए लिया था. जब राजा सत्यरथ की मृत्यु हो गयी थी तथा उनकी पत्नी को एक घड़ियाल का आहर बनना पड़ा तब उनके पुत्र को भगवान शिव ने भिक्षुवर्य रूप धारण कर एक भिखरिन को दे उसकी जान बचाई, जब वह बड़ा हुआ तो उसने अपने शत्रुओ का नाश किया.

5. सुरेश्वर अवतार :– इस अवतार में भगवान शिव ने उपमन्यु नामक अपने भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपनी परम भक्ति व अमरता का वरदान दिया.

6. किरात अवतार :- इस अवतार में भगवान शिव ने पाण्डु पुत्र अर्जुन की परीक्षा ली थी. जब पांडव वनवास में थे तब अर्जुन को मारने के लिए दुर्योधन ने एक मूड नामक दैत्य सुवर के भेष में भेजा. अर्जुन ने उस दैत्य को मारने के लिए उस पर अपने बाणो से प्रहार किया. जब अर्जुन उस दैत्य पर बाण चला रहे थे उसी समय भगवान शिव भी किरात रूप में आकर उस दैत्य को बाणो से भेदने लगे. दैत्य के मरते ही अर्जुन और किरात में दैत्य को मरने को लेकर विवाद उत्तपन्न हो गया. इस विवाद को लेकर दोनों में भयंकर युद्ध शुरू हो गया व युद्ध में अर्जुन के पराक्रम को देख भगवान शिव उनसे प्रसन्न हुए व कौरवो के साथ युद्ध में उन्हें विजयी होने का वरदान दिया.

7. सुनटनर्तक अवतार;- यह अवतार भगवान शिव ने हिमालय पर्वत से उनकी पुत्री पार्वती का हाथ मागने के लिए लिया था.

8. ब्रह्मचारी अवतार;- यह अवतार भगवान शिव ने माता पर्वती की परीक्षा लेने के लिए लिया था. ब्रह्मचारी अवतार में भगवान शिव माता पार्वती के समीप गए तथा उन्हें शिवजी के बारे में बुरा भला कहने लगे तथा उनसे विवाह न करने की सलाह दी . इस पर भी माता पर्वती भगवान शिव से विवाह करने के निश्चय में अटल रही तो भगवान शिव ने उनसे प्रसन्न होकर अपने वास्तविक रूप  में दर्शन दिए.

9.यक्ष अवतार ;-  इंद्र आदि को अमृत का सेवन करने से मिली शक्ति पर घमंड आ गया जिसे भगवान शिव ने यक्ष अवतार लेकर तोडा. उन्होंने देवताओ के सामने यक्ष रूप में जाकर एक तिनका रखा तथा उसे तोड़ने के लिए कहा. कोई भी देवता उस तिनके को तोड़ने में समर्थ नही हो पाया अंत में उन्होंने यक्ष से अपने अभिमान के लिए क्षमा मांगी.

10. वीरभद्र अवतार;-माता सती के वियोग में भगवान शिव ने वीरभद्र का अवतार धर राजा दक्ष का यज्ञ भंग किया था.

11. पिप्लाद अवतार ;- पिप्लाद अवतार में भगवान शिव ने अपने पिता का बदला शनि देव से लिया था. पिप्लाद के रूप में भगवान शिव ने ऋषि दधीचि के आश्रम में जन्म लिया परन्तु उनके जन्म के कुछ दिनों बाद ही ऋषि की मृत्यु हो गई. जब पिप्लाद ने देवताओ से उनके पिता की  मृत्यु का कारण पूछा तो देवताओ ने उन्हें शनि की कुदृष्टि उनके पिता की मृत्यु का कारण बताया. क्रोधित पिप्लाद ने शनी को नक्षत्र से गिरने का श्राप दे दिया. शनि आकश से जमीन की और गिरने लगे बाद में देवताओ के कहने पर पिप्लाद ने शनि देव को क्षमा कर दिया.

12. नंदी अवतार ;- भगवान शंकर सभी जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं. भगवान शंकर का नंदीश्वर अवतार भी इसी बात का अनुसरण करते हुए सभी जीवों से प्रेम का संदेश देता है. नंदी (बैल) कर्म का प्रतीक है, जिसका अर्थ है कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है. नंदी अवतार भी भगवान शिव के 19 अवतारों में से एक है.

13. अश्वत्थामा अवतार ;-महाभारत के एक पात्र और गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा भगवान शिव के ही एक अंश थे. ऐसी मान्यता है की भगवान शिव के यह अवतार अमर है और आज भी पृथ्वी पर विचरण करते है.

14. भैरव अवतार;- एक बार भगवान शिव की माया के प्रभाव से ब्रह्मा और विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगे तब उनके सामने एक दिव्य प्रकाश के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए. ब्रह्मा ने शिव से कहा की तुम मेरे ही पुत्र हो अतः मेरी शरण में आओ. ब्रह्मा के इस बात से भगवान शिव क्रोधित हुए तथा उनके क्रोध से एक अंश का उत्तपन्न हुआ जो भैरव कहलाये उन्होंने ब्रह्मा के पांच सिरो में से एक सर कटा था .

15.शरभावतार ;-  शरभावतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधा मृग (हिरण) तथा शेष शरभ पक्षी (पुराणों में वर्णित आठ पैरों वाला जंतु जो शेर से भी शक्तिशाली था) का था. इस अवतार में भगवान शंकर ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था.

16. गृहपति अवतार ;-धर्मपुर नगर में विश्वानर नामक ऋषि रहता था तथा उसकी पत्नी का नाम शुचिष्मती था. विश्वानर का कोई पुत्र नही था अतः एक दिन पुत्र प्राप्ति के लिए वह भगवान शिव के वीरेश लिंग के समक्ष ध्यान मुद्रा में लीन हो गए. भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया तथा उनकी पत्नी शुचिष्मती के गर्भ से जन्म लिया. विश्वानर ने अपने बालक का नाम गृहपति रखा.

17. ऋषि दुर्वासा ;-भगवान शिव ने ऋषि दुर्वासा के रूप में सती अनुसूइया के गर्भ से जन्म लिए था तथा माना जाता है की भगवान शिव का ये अवतार उनके क्रोध का प्रतीक था.

18. वृषभ अवतार;-इस अवतार में भगवान शिव ने विष्णु भगवान के दुष्ट स्वभाव के समस्त  पुत्रो का संहार किया था.

19. हनुमान अवतार ;- इस अवतार में भगवान शिव ने अपने प्रभु राम की पत्नी माता सीता को खोजने व लंका के रावण के साथ युद्ध में मदद की थी. माना जाता है की भगवान शिव के यह अवतार आज भी जीवित है व अपने भक्तो की कष्टो से रक्षा करते है.

 

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